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वानप्रस्थ आश्रम — वैराग्य, आत्मचिंतन और आंतरिक जीवन की ओर यात्रा

प्रस्तावना वानप्रस्थ आश्रम वैदिक जीवन-पद्धति के चार आश्रमों में तीसरा आश्रम है। यह ब्रह्मचर्य और गृहस्थ आश्रम के पश्चात् आता है तथा साधक को अंतिम आश्रम संन्यास के लिए तैयार…

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आरण्यक ग्रंथ — बाहरी अनुष्ठान से आंतरिक साधना की ओर संक्रमण

प्रस्तावना आरण्यक ग्रंथ वैदिक साहित्य का तीसरा महत्वपूर्ण भाग हैं। ये ब्राह्मण ग्रंथों और उपनिषदों के बीच स्थित हैं तथा वैदिक चिंतन के विकास में एक महत्वपूर्ण सेतु का कार्य…

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अग्नि (Agni) — देवताओं और मानव के बीच दिव्य मध्यस्थ

प्रस्तावना वैदिक परंपरा में अग्नि का स्थान अत्यंत महत्वपूर्ण और सर्वोच्च माना गया है। इसका प्रमाण यह है कि ऋग्वेद का प्रथम मंत्र ही अग्निदेव की स्तुति से आरम्भ होता…

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