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आरण्यक ग्रंथ — केवल कर्मकाण्ड और उपनिषदों के बीच सेतु नहीं, बल्कि मनोवैज्ञानिक ग्रंथ

प्रस्तावना आरण्यक ग्रंथों को सामान्यतः ब्राह्मण ग्रंथों और उपनिषदों के बीच का सेतु माना जाता है। यह दृष्टिकोण सही है, क्योंकि वे बाहरी यज्ञ और अनुष्ठानों से आत्मज्ञान एवं ब्रह्मविद्या…

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बाहरी कर्मकाण्ड के प्रभुत्व में कमी — अनुष्ठान से आत्मसाक्षात्कार तक की यात्रा

प्रस्तावना वैदिक परंपरा के प्रारम्भिक चरण में यज्ञ, हवन और वैदिक अनुष्ठान धार्मिक तथा सामाजिक जीवन के केंद्र में थे। ये केवल पूजा-पद्धति नहीं थे, बल्कि प्रकृति के प्रति कृतज्ञता,…

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यज्ञ का आंतरिकीकरण — बाहरी यज्ञ से आंतरिक साधना तक

प्रस्तावना वैदिक दर्शन के विकास में सबसे महत्वपूर्ण और गहन परिवर्तनों में से एक है यज्ञ का आंतरिकीकरण (Internalization of Sacrifice)। प्रारम्भिक वैदिक काल में यज्ञ मुख्यतः अग्नि, मंत्र, आहुति…

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